22.05.2017 - UNESCO Office in New Delhi

Accessible films made possible: more than 1000 visual and hearing impaired enjoyed Bollywood film together सहजगम्य फिल्में संभव हैं: देखने-सुनने में मुश्किलों का सामना करने वाले 1000 से ज्यादा लोगों ने बॉलीवुड फिल्म का आनंद उठाया

It’s Saturday morning at Siri Fort Auditorium complex, and the clock strikes 9 am. The housekeeping staff is ensuring that floor to the auditorium has been cleaned spotless, caterers are on their toes organizing water bottles and packing snack boxes, and technicians are seen inspecting the auditorium microphones and lights. Soon, buses filled with children and teachers assemble at the main gate, and are escorted to the Audi 1, where the audio-described popular Bollywood film “Dangal” is to be screened. 

While journalists, film makers, special educators, technical experts are seen heading towards the Audi 4.  They’re gathered for the ‘Workshop on making cinema enjoyable experience for persons with disabilities’ organized by UNESCO New Delhi with the support from Directorate of Film Festivals and Saksham Trust. The workshop introduced the concept of ‘Audio-Description’, a feature, when combined with subtitles, enables a person with visual and/or hearing impairment to appreciate cinema the same way as an abled person.

Ms Moe Chiba, Programme Specialist for Culture, UNESCO New Delhi, thanked the partners, Ministry of Social Justice and Empowerment (MSJE), Directorate of Film Festivals (DFF) and Saksham Trust for collaborating in this event, while noting that the world including India is shifting towards an inclusive society, the participation of person with disabilities in cultural enjoyment is perhaps one aspect that has been too often neglected. 

The workshop had participation from Mr T D Dhariyal, Commissioner for the Dept of Disabilities, Ministry of Social Justice and Empowerment, as a chief guest. The Commissioner referred to Article 42 of the Persons with Disabilities Act 2016 which highlights the inclusion of audio-description and subtitles to all electronic media contents. Joining his voice, Mr Senthil Rajan, Director, Directorate of Film Festivals, announced his intention to organize a festival of accessible films with MSJE and institutional partners.

The workshop was followed by the screening of audio-described Bollywood film ‘Dangal’ starring Aamir Khan. More than 1000 people of diverse age groups with visual and/or hearing impairment attended the film screening. This was probably the largest gathering ever seen for an accessible film. There were thunderous applauses and giggles heard during the film, especially climax scenes which shows the effectiveness of audio description. Presence of sign language interpreters made watching the film more interesting for the hearing impaired. When interviewed, some participants noted that it was the first time they have gone out to watch accessible films and requested more screenings in near future.

In order to bring more smiles on their face, UNESCO, with support from institutional partners, will continue to work towards accessible cinema for all.

सहजगम्य फिल्में संभव हैं: देखने-सुनने में मुश्किलों का सामना करने वाले 1000 से ज्यादा लोगों ने बॉलीवुड फिल्म का आनंद उठाया

सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में शनिवार की सुबह के नौ बजे हैं. हाउसकीपिंग स्टाफ लगातार इसका ध्यान रख रहे हैं कि सभागार की फर्श पर बेदाग सफाई बनी रहे, कैटरर पानी की बोतलें ला और ले जा रहे हैं और नाश्ते के डिब्बे पैक कर रहे हैं. तकनीशियन ऑडिटोरियम के माइक्रोफोन और लाइटों की जांच करते हुए दिख रहे हैं. जल्दी ही, बच्चों और शिक्षकों से भरी हुई बसें मुख्य द्वार पर आ लगती हैं और उन्हें ऑडी 1 में ले जाया जाता है, जहां ऑडियो विवरण वाली बॉलीवुड फिल्म दंगल का प्रदर्शन किया जाने वाला है.

इस बीच पत्रकार, फिल्मकार, विशेष शिक्षाकर्मी, तकनीकी विशेषज्ञ ऑडी 4 की ओर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं. वे ‘वर्कशॉप ऑन मेकिंग सिनेमा एन्जॉएबल एक्सपीरियंस फॉर पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज’ के लिए आए हैं, जिसको यूनेस्को नई दिल्ली ने फिल्म समारोह निदेशालय और साक्षम ट्रस्ट की सहायता से आयोजित किया है. इस कार्यशाला में ‘ऑडियो डिस्क्रिप्शन’ यानी ऑडियो विवरण वाली विशेषता के बारे में बताया जाता है, जिसके तहत फिल्मों का ऑडियो, सबटाइटलों के साथ मिल कर सुनने और/या देखने में मुश्किलों का सामना करने वाले लोगों को भी सक्षम लोगों की तरह फिल्मों का आनंद लेना संभव बनाता है.

मिस मो चीबा, प्रोग्राम स्पेशलिस्ट फॉर कल्चर, यूनेस्को नई दिल्ली ने भागीदारों, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय (एमएसजेई), फिल्म समारोह निदेशालय (डीएफएफ) और साक्षम ट्रस्ट का इस आयोजन के लिए सहयोग देने के लिए आभार जताया. साथ ही उन्होंने इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि भारत समेत पूरी दुनिया एक समावेशी समाज की तरफ बढ़ रही है, जिसमें सांस्कृतिक मनोरंजन में अक्षमताओं वाले व्यक्तियों की भागीदारी शायद एक ऐसा पहलू है, जिसे आम तौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

कार्यशाला में श्री टी.डी. धारियाल, आयुक्त, डिपार्टमेंट ऑफ डिसएबिलिटीज, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. आयुक्त ने पर्सन्स विद डिसएबिलीटीज़ एक्ट 2016 के अनुच्छेद 42 का हवाला दिया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सारी सामग्री में ऑडियो विवरण और सबटाइटलों को शामिल करने पर जोर दिया गया है. उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए श्री सेंथिल राजन, निदेशक, फिल्म समारोह निदेशालय ने एमएसजेई और संस्थागत भागीदारों के साथ मिल कर सभी तरह के व्यक्तियों द्वारा सहज रूप से देखी जा सकने वाली (सहजगम्य) फिल्मों का एक समारोह आयोजित करने के अपने इरादे के बारे में घोषणा की.
कार्यशाला के बाद ऑडियो विवरण युक्त, आमिर खान के अभिनय वाली बॉलीवुड फिल्म दंगल का प्रदर्शन किया गया. देखने और/या सुनने में मुश्किलों का सामना करने वाले अलग-अलग आयु समूहों के 1000 लोग इस मौके पर उपस्थित थे. एक सहजगम्य फिल्म को देखने के लिए जमा हुई शायद यह सबसे बड़ी संख्या थी. फिल्म के दौरान दर्शकों के बीच से तालियों और हंसी की आवाजें सुनी गईं, खास कर क्लाइमेक्स के दृश्यों में जिससे ऑडियो विवरण की कारगरता जाहिर होती है. सुनने में मुश्किलों का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए संकेत भाषा में व्याख्या करने वालों की मौजूदगी ने फिल्म देखने के अनुभव को और भी दिलचस्प बना दिया. जब भागीदारों से इसके बारे में बात की गई तो उन्होंने इसकी तरफ ध्यान दिलाया कि वे पहली बार एक सहजगम्य फिल्म देखने आए थे और उन्होंने जल्दी ही ऐसे और भी प्रदर्शनों का आग्रह किया.

चेहरों पर और भी मुस्कानें लाने के लिए यूनेस्को, संस्थागत भागीदारों के साथ मिल कर, सबके लिए सहजगम्य सिनेमा की दिशा में काम करना जारी रखेगा.




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