27.04.2017 - UNESCO Office in New Delhi

India Launch of the UN World Water Development Report 2017: Wastewater the Untapped Resource संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2017: ‘अपशिष्ट जल- एक संसाधन जो इस्तेमाल में नहीं लाया गया है’ का भारत में विमोचन

UNESCO New Delhi, UNIC New Delhi, and media partner The Statesman held the National Launch of the 2017 United Nations World Water Development Report (WWDR), “Wastewater: the Untapped Resource” at the UNESCO House, 1 San Martin Marg, Chanakyapuri New Delhi today from 11:00 a.m.-12:30 p.m. 

The report was launched by Shri Parameswaran Iyer, Secretary, Department of Water and Sanitation, Government of India.  The event was moderated by Derk Segaar, Director, United Nations Information Centre for India and Bhutan. Other speakers included Mr Jaco Cilliers, UN Resident Coordinator a.i.,  Mr R.D. Singh, Director, National Institute of Hydrology, IIT Roorkee,; and Mr Mitrasen Bhikajee, Head of Science Sector, UNESCO New Delhi Cluster office.   There was also a presentation of prizes to the winners of UNESCO New Delhi’s 2016 #Science4Sustainability Photo Competition.  The launch ceremony was attended by over 100 people, including representatives from NGOs, diplomatic community, academicians, students and experts working in the field of water.   

In his opening remarks, UNESCO New Delhi Director and UNESCO Representative, Shigeru Aoyagi said, “It is important not to forget that putting a stop to pollution at the source is just as important as developing ways to treat and utilize wastewater. If both problems are tackled, then we will be on the path to achieving the water-related SDGs.”

In his address, Shri Iyer while congratulating the UN family and particularly UNESCO on bringing out this comprehensive report on wastewater, said “Water is rapidly reaching crisis-like proportions not only in the world but also in India.  Wastewater is traditionally viewed as a problem rather than opportunity.  If we can be more efficient in the way we handle our water and wastewater systems, we can immediately reduce the quantity, the amount that needs to be recycled, but it can also make water systems more efficient.”

“Wastewater is often thought of as just that, waste. But in actuality, it often contains nutrients and other useful substances that can be repurposed,” noted Mr. Bhikajee. He went on, “The key is seeing the enormous potential that wastewater holds for reducing our water abstraction and minimizing pollution.”

The Report focuses on the ways in which improved wastewater management can generate social, environmental and economic benefits essential for achieving the 2030 Agenda for Sustainable Development.

Published annually, this year’s WWDR seeks to inform decision-makers in government, civil society and the private sector about the importance of managing wastewater as an undervalued and sustainable source of water, energy, nutrients and other recoverable by-products, rather than something to be disposed of or a nuisance to be ignored. The report highlights the critical role that wastewater is poised to play in the context of a circular economy, whereby economic development is balanced with the protection of natural resources and environmental sustainability, and where a cleaner and more sustainable economy has a positive effect on water quality. It argues that once treated, wastewater could prove invaluable in meeting the growing demand for freshwater and other raw materials.

The United Nations World Water Development Report is a UN-Water Report produced by the UN World Water Assessment Programme of UNESCO. The Report is the result of the collaboration between the 31 entities of the United Nations System and the 38 international partners that comprise UN-Water. The Report presents an exhaustive review of the state of global water resources and, up until 2012, was published every three years. Since 2014, the WWDR is published annually, with each edition focused on a given theme. It is launched every year on World Water Day, 22 March, which shares the same theme as the report.
To download the Full Report, Executive Summary and other information material click here

For further information, contact:

Mitra Bhikajee, Head of Science Sector (m.bhikajee(at)unesco.org)
Rekha Beri, Documentalist and Public Information (r.beri(at)unesco.org)

संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2017: ‘अपशिष्ट जल- एक संसाधन जो इस्तेमाल में नहीं लाया गया है’ का भारत में विमोचन

नेस्को नई दिल्ली, यूएनआईसी नई दिल्ली और मीडिया पार्टनर द स्टेट्समैन  ने 2017 संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट के राष्ट्रीय विमोचन का आयोजन किया. यूनेस्को हाउस, 1 सान मार्तिन मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में आज सुबह 11 बजे से 12.30 के बीच जारी की गई इस रिपोर्ट का शीर्षक है: “अपशिष्ट जल: एक संसाधन जो इस्तेमाल में नहीं लाया गया है”.

रिपोर्ट को पेयजल और स्वच्छता विभाग, भारत सरकार के सचिव श्री परमेश्वरन अय्यर ने जारी किया. इस आयोजन का संचालन भारत व भूटान के लिए संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र के निदेशक डर्क सेगर ने किया. अन्य वक्ताओं में श्री जेको सिलियर्स, संयुक्त राष्ट्र रेजीडेंट कोऑर्डिनेटर ए.आई., मि. आर.डी. सिंह, निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, आईआईटी रुड़की; और श्री मित्रसेन भिकाजी, प्रमुख, साइंस सेक्टर, यूनेस्को नई दिल्ली क्लस्टर ऑफिस शामिल थे. इसके साथ ही यूनेस्को नई दिल्ली के 2016 #Science4Sustainability फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए पुरस्कार भी प्रस्तुत किए गए. विमोचन समारोह में 100 से अधिक संख्या में लोग उपस्थित थे, जिनमें गैर सरकारी संगठनों, कूटनीतिक समुदाय, अकादमिक दुनिया के सदस्यों के साथ साथ जल के क्षेत्र में काम कर रहे छात्र और विशेषज्ञ शामिल थे.

अपने उद्घाटन वक्तव्य में यूनेस्को नई दिल्ली के निदेशक और यूनेस्को के प्रतिनिधि शिगेरु आओयागी ने कहा, “इसको याद रखना महत्वपूर्ण है कि स्रोत पर ही जल के प्रदूषण को रोकना उतना ही अहम है, जितना अपशिष्ट जल का उपचार करना और उसको उपयोग में लाने के रास्तों का विकास करना. अगर दोनों समस्याओं को सुलझा लिया गया, तो हम जल-संबंधी टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के रास्ते पर बढ़ चलेंगे.”

अपने संबोधन में श्री अय्यर ने संरा परिवार और खास कर यूनेस्को को अपशिष्ट जल पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए शुभकामना दी. उन्होंने कहा, “जल तेजी से संकट के मुहाने पर पहुंच रहा है और ऐसा दुनिया भर में ही नहीं, भारत में भी हो रहा है. अपशिष्ट जल को परंपरागत रूप से एक अवसर के बजाए समस्या के रूप में देखा जाता रहा है. अगर हम जल और अपशिष्ट जल तंत्रों के संचालन में अधिक सक्षम हो सकें तो हम फौरन ही जल की उस मात्रा में कमी ला सकेंगे जिसका पुनर्चक्रीकरण किए जाने की जरूरत पड़ती है, बल्कि यह जल तंत्र को भी अधिक कारगर बना सकेगा.”

“अपशिष्ट जल को अक्सर ही महज एक अपशिष्ट या कचरा मान लिया जाता है. लेकिन असल में, इसमें अक्सर ही पोषक तत्व और दूसरे उपयोगी पदार्थ होते हैं, जिनको फिर से इस्तेमाल में लाया जा सकता है,” श्री भिकाजी ने ध्यान दिलाया. उन्होंने आगे कहा, “मुख्य बात अपशिष्ट जल में निहित उस व्यापक संभावना को देखना है, जो जल स्रोतों से ताजा जल की निकासी और प्रदूषण को कम करने से जुड़ी हुई है.”
रिपोर्ट में उन तरीकों पर गौर किया गया है, जिनके जरिए बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन ऐसे सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक फायदों को जन्म दे सकता है, जो 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवेलपमेंट (टिकाऊ विकास के लिए 2030 एजेंडा) को प्राप्त करने के बुनियादी शर्त हैं.

सालाना प्रकाशित होने वाली यह रिपोर्ट इस साल सरकारी, सिविल सोसायटी और निजी क्षेत्र के नीति निर्माताओं को इस बात के बारे में सूचित करती है कि अपशिष्ट जल को एक ऐसी चीज के रूप में देखने के बजाए जिससे छुटकारा पाना है या एक परेशानी के रूप में इसकी अनदेखी की जानी है, इसको जल, ऊर्जा, पोषक तत्वों और फिर से हासिल किए जाने वाले अन्य सहउत्पादों के एक ऐसे स्रोत के रूप में देखना कितना अहम है, जिसका मूल्य कम करके आंका गया है. इसलिए रिपोर्ट टिकाऊ स्रोत के रूप में अपशिष्ट जल के प्रबंधन की अहमियत पर जोर देती है. रिपोर्ट में एक चक्रीय अर्थव्यवस्था में अपशिष्ट जल द्वारा निभाई जा सकने वाली अहम भूमिका को रेखांकित किया गया है, जिसके जरिए आर्थिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बना रहेगा और जहां एक साफ और अधिक टिकाऊ अर्थव्यवस्था का जल की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इसमें दलील दी गई है कि एक बार उपचार किए जाने के बाद अपशिष्ट जल ताजे जल और अन्य कच्ची सामग्री की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने में अमूल्य साबित हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट, यूएन-वाटर (संरा-जल) की रिपोर्ट है जो यूनेस्को के यूएन वर्ल्ड वाटर असेसमेंट प्रोग्राम द्वारा तैयार की जाती है. रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र तंत्र की 31 संस्थाओं और 38 अंतरराष्ट्रीय साझीदारों (जो यूएन-वाटर के घटक हैं) के मिले-जुले प्रयास का नतीजा है. यह रिपोर्ट वैश्विक जल संसाधनों की स्थिति की एक विस्तृत समीक्षा पेश करती है और 2012 तक यह हर तीसरे साल प्रकाशित हुआ करती थी. 2014 से डब्ल्यूडब्ल्यूडीआर सालाना प्रकाशित होती है और इसका हर अंक एक निश्वित विषय पर केंद्रित होता है. हर साल इसका विमोचन विश्व जल दिवस 22 मार्च को होता है, जिसकी थीम उस साल की रिपोर्ट के विषय के समान होती है.

पूरी रिपोर्ट, कार्यकारी सारांश और दूसरी सामग्री डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें.

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