23.01.2017 - UNESCO Office in New Delhi

The IUIF Fellowships 2016–17: Engaging Youth to Deploy Communication for Social Change आईयूआईएफ फेलोशिप 2016-17: सामाजिक बदलाव के लिए संवाद के असरदार उपयोग में युवाओं को साथ लाते हुए

In early 2016, Ideosync Media Combine, UNESCO and India Fellow partnered to launch a Fellowship Programme on Communication for Social Change (C4SC) and Media Rights. Known as the Ideosync UNESCO India Fellow (IUIF) Fellowship Programme, it operates within larger framework of the India Fellow Programme, an established social leadership initiative for young Indians to acquire a hands-on understanding of the social sector through specialized training and a twelve-month period of full-time work with a development organization on a specific project.

The IUIF Fellows 2016–17 are a cohort of five fellows from diverse academic backgrounds, who are currently being trained in a wide range of tools and techniques related to media, communications and ICTs. Along with the training course, the Fellows are working on projects with organizations that deal with children’s rights, citizens’ legal entitlements, media research and advocacy related to environmental issues, public health, and the use of community radio for grassroots development.

The Fellows’ training and field projects have been designed for them to understand communications and the media from a rights perspective, and leverage the power of the media to create new inroads for information creation, access and sharing, leading to improved social, political and economic outcomes for marginalized communities. Each Fellow is being equipped with an understanding of the key principles of C4SC. Community participation, knowledge, equity and freedom will form the core of the fellowship along with an understanding of media rights and freedoms. Fellows are also acquiring basic media skills of writing and creating AV content, and implementing relevant research methodologies.

The Fellows’ orientation and initial training took place in Udapiur in July 2016, and was followed by six months of fieldwork with their host organizations. In January the Fellows convened in New Delhi for their ‘mid-point training’ which concluded with an interactive session with representatives from the various sectors at the UNESCO Office in New Delhi.

At the mid-point interaction at UNESCO, senior representatives from the Education, Natural Sciences, Social and Human Science, Culture, and Communication and Information Sectors emphasized the intersectoral approach to development interventions; gave the Fellows valuable insights into the operations of UN agencies and their methods of engaging with stakeholders; and drew attention to the ways in which UN agencies have begun aligning their interventions with the Sustainable Development Goals of the Agenda 2030. The Sectors agreed to explore the possibility of helping strengthen and expand the IUIF Programme in 2017–18.

The Fellows will return to their host organizations to complete their projects and will come together for a final round of training, stock-taking and knowledge-sharing in June–July 2017. 

आईयूआईएफ फेलोशिप 2016-17: सामाजिक बदलाव के लिए संवाद के असरदार उपयोग में युवाओं को साथ लाते हुए 

2016 के शुरुआती दौर में इडियोसिंक मीडिया कंबाइन, यूनेस्को और इंडिया फेलो ने मिल कर फेलोशिप प्रोग्राम ऑन कम्युनिकेशंस फॉर सोशल चेंज (C4SC) एंड मीडिया राइट्स की शुरुआत की थी. इडियोसिंक यूनेस्को इंडिया फेलो (आईयूआईएफ) फेलोशिप प्रोग्राम के नाम से जाना जाने वाला यह कार्यक्रम इंडिया फेलो प्रोग्राम की व्यापक रूपरेखा के तहत काम करता है, जो युवा भारतीयों के लिए सामाजिक नेतृत्व की एक स्थापित पहलकदमी है, ताकि वे एक विशेष प्रशिक्षण हासिल करें और एक निश्चित परियोजना पर एक विकास संगठन के साथ बारह महीनों तक पूर्णकालिक रूप से काम करते हुए सामाजिक क्षेत्र की एक भागीदारी परक समझदारी हासिल कर सकें. 

2016-17 में आईयूआईएफ फेलो हासिल करने वाले पांच फेलो का समूह विभिन्न अकादमिक पृष्ठभूमियों से आता है, जो मीडिया, संवाद और सूचना एवं संचार तकनीक के उपकरणों और तकनीकी की एक व्यापक शृंखला के जरिए प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं. प्रशिक्षण कोर्सों के साथ-साथ, ये फेलो उन संगठनों के साथ परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनमें बच्चों के अधिकारों, नागरिकों की कानूनी हकदारियों, पर्यावरणीय मुद्दों पर मीडिया शोध और पैरवी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जमीनी विकास के लिए सामुदायिक रेडियो के उपयोग आदि शामिल हैं.

फेलो का प्रशिक्षण और फील्ड परियोजनाओं का स्वरूप ऐसा बनाया गया है कि वे संवादों और मीडिया को अधिकारों के नजरिए से समझ सकें और मीडिया की शक्ति में इस तरह इजाफा करें कि वह सूचना के निर्माण, पहुंच, बंटवारे के लिए नई संभावनाएं निर्मित करे, जिससे हाशिए के समुदायों के हक में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक नतीजे हासिल हों. हर फेलो को C4SC के मुख्य सिद्धांतों की समझ से लैस किया जा रहा है. सामुदायिक भागीदारी, ज्ञान, हिस्सेदारी और आजादी इस फेलोशिप के केंद्रबिंदु होंगे, जिसमें मीडिया अधिकारों और स्वतंत्रता की समझ भी होगी. पांचों फेलो ऑडियो-विजुअल सामग्री लिखने और उसकी रचना करने और प्रासंगिक शोध पद्धतियों को लागू करने का बुनियादी मीडिया कौशल भी अर्जित कर रहे हैं.

सभी फेलो का दिशा निर्धारण (ओरिएंटेशन) और आरंभिक प्रशिक्षण जुलाई 2016 में उदयपुर में हुआ और इसके बाद उनके संगठनों के साथ छह महीने का फील्डवर्क हुआ. जनवरी में सभी फेलो नई दिल्ली में अपनी ‘मिड-प्वाइंट ट्रेनिंग’ (मध्यावधि प्रशिक्षण) के लिए जमा हुए जिसका समापन यूनेस्को नई दिल्ली कार्यालय में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ एक परिसंवाद सत्र के साथ हुआ.

यूनेस्को में हुए इस मध्यावधि परिचर्चा में शिक्षा, प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक और मानव विज्ञान, संस्कृति और संचार तथा सूचना क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने विकास पहलकदमियों में अंतरक्षेत्रीय नजरिए पर जोर दिया; सभी फेलो को इसको लेकर मूल्यवान अंतरदृष्टियां दी गईं कि संरा की एजेंसियां किस तरह कामकाज करती हैं और पक्षकारों के साथ वे कैसे भागीदारी करती हैं. साथ ही उनका ध्यान उन तौर-तरीकों की तरफ भी दिलाया गया, जिसके साथ संरा एजेंसियों ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों के एजेंडा 2030 के साथ अपनी पहलकदमियों की तालमेल बिठाई है. इन सेक्टरों ने 2017-18 में आईयूआईएफ प्रोग्राम को और सशक्त बनाने और इसको विस्तृत करने में मदद करने की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई.

फेलो अपने होस्ट संगठनों में लौट जाएंगे ताकि वे अपनी परियोजनाएं पूरी कर सकें और जून-जुलाई 2017 में अंतिम दौर के प्रशिक्षण, समीक्षा तथा हासिल किए गए ज्ञान को साझा करने के लिए साथ आएंगे. 




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